8th Pay Commission: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक काफी समय से 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीद लगाए बैठे थे। सबसे बड़ी चर्चा इस बात की थी कि इस बार महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का बड़ा हिस्सा मूल वेतन में जोड़ा जाएगा। कर्मचारी संगठनों के बीच यह अनुमान लगाया जा रहा था कि लगभग 60 प्रतिशत तक DA और DR को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जा सकता है, जिससे वेतन ढांचे में स्थायी मजबूती आएगी और भविष्य की बढ़ोतरी भी उसी आधार पर होगी।
DA-DR मर्ज होने से क्या बदल जाता
अगर महंगाई भत्ता मूल वेतन में शामिल होता, तो इसका असर सिर्फ मासिक सैलरी तक सीमित नहीं रहता। बेसिक बढ़ने से मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता, मेडिकल सुविधाएं और अन्य भत्तों की गणना भी ऊंचे स्तर पर होती। पेंशनभोगियों के लिए यह फैसला और भी अहम माना जा रहा था, क्योंकि उनकी पेंशन सीधे बेसिक वेतन से जुड़ी होती है और इससे उन्हें लंबे समय तक फायदा मिल सकता था।
संसद में सरकार का साफ जवाब
नवंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में संसद में सरकार की ओर से दिए गए जवाब ने इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि 8वें वेतन आयोग के तहत फिलहाल DA या DR को मूल वेतन या मूल पेंशन में शामिल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस बयान के बाद कर्मचारियों और पेंशनरों में निराशा का माहौल देखने को मिला और कई संगठनों ने इस फैसले पर असहमति भी जताई।
कर्मचारियों की चिंता क्यों बढ़ी
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में DA-DR को बेसिक में न जोड़ने से उनकी वास्तविक आय पर दबाव बना रहेगा। उनका मानना है कि अगर यह मर्जर होता, तो वेतन और पेंशन दोनों ही ज्यादा स्थिर और मजबूत बनते। हालांकि इस फैसले से उम्मीदों को झटका लगा है, लेकिन कर्मचारी अब आगे होने वाली महंगाई भत्ता वृद्धि पर नजर लगाए हुए हैं।
8th Pay Commissionv आगे की उम्मीदें
भले ही DA-DR मर्जर को लेकर स्थिति साफ हो गई हो, लेकिन 1 जनवरी से नई DA बढ़ोतरी को लगभग तय माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाली महंगाई भत्ता वृद्धि कितनी होगी और वह केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों को कितनी राहत दे पाएगी।